बर्थडे स्पेशल: भारतीय सिनेमा में अतुल्नीय रहा है लता मंगेश्कर का योगदान

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Source: BBC

                                            ऐ मेरे वतन के लोगों, ज़रा आंख में भर लो पानी।

                                           जो शहीद हुए हैं उनकी, ज़रा याद करो कुरबानी।।

सन् 1963 में लता मंगेश्कर द्वारा जब यह गाना गाया गया था तो हर हिन्दुस्तानी की आंखे नम हो गई थी। लता मंगेश्कर भारत की सबसे प्रसिद्ध पार्श्व गायिका रही हैं। पिछले 7 दशकों से वह अपनी कोयल जैसी मधुर आवाज से भारतीय फिल्मों में योगदान दे रही हैॆ। लता जी ने लगभग 36 देशी-विदेशी भाषाओं में 30,000 से अधिक गाने गाए हैं। लता जी, आशा भोसले की बड़ी बहन है। भारतीय फिल्मों में अतुल्नीय योगदान के लिए लता जी को भारत के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार ‘भारत रत्न’ से भी सम्मानित किया जा चुका है।

कम उम्र में ही सम्भाली परिवार की जिम्मेदारी

मध्य प्रदेश के इंदौर की रहने वाली लता मंगेश्कर के पिता दीनानाथ मंगेश्कर एक प्रसिद्ध शास्त्रीय संगीतकार थे। कहा जाता है की लता जी को स्वर उनके पिता जी की विरासत में ही मिला है। 5 वर्ष की उम्र से ही लता ने संगीत सीखना शुरु कर दिया था। जब लता मात्र 13 वर्ष की थीं, तो उनके पिता जी का स्वर्गवास हो गया था। ऐसे में बेहद कम उम्र में ही उनके ऊपर पूरे घर की जिम्मेदारी आ गई थी। अपने पांच भाई-बहनों में लता जी सबसे बड़ी थीं।

घर चलाने के लिए 13 वर्ष की उम्र से ही लता ने फिल्मों में अभिनय करना शुरू कर दिया था। इसके बाद धीरे-धीरे उन्होंने अपनी मधुर आवाज का जादू बिखेरना शुरु किया। लता जी को गायिका के तौर पर अपनी पहचान बनाने में भी काफी दिक्कतें भी हुई। कई निर्माताओं ने उन्हें यह कहकर मना कर दिया था कि उनकी आवाज़ कुछ ज्यादा ही पतली है। लता जी को असली पहचान 1947 में वसंत जोगलेकर की फिल्म ‘आपकी सेवा’ से मिली।

स्कूल से निकाल दिया गया

लता मंगेश्कर स्कूल में अपने मित्रों को संगीत के बारे में बताया करती थीं। कई बच्चे उनसे संगीत सीखना भी चाहते थे। यह बात स्कूल प्रशासन को पसन्द नहीं आई और उन्हें स्कूल से निकाल दिया गया था। वहीं कुछ अन्य लोगों का कहना है कि लता एक दिन अपनी बहन आशा को अपने साथ स्कूल ले गई थी। स्कूल कमेटी ने कहा कि आशा को स्कूल में पढ़ना है तो उन्हें अलग से फीस देनी पड़ेगी। आर्थिक स्थिति कमजोर होने कारण वह आशा की फीस देने में असमर्थ थी। उस दिन के बाद लता कभी स्कूल नहीं गई। हालांकि दुनिया के 6 विश्वविद्यालयों से उन्हें मानक उपाधि प्रदान की गई है।

Lata Mangeshkar childhood
Source: Mid Day

ऐसी थी लव लाइफ

लता मंगेश्कर अपने पूरे जीवन में अविवाहित रही हैं। लता जी का कहना है कि बचपन में ही घर संभालने की जिम्मेदारी के कारण वह कभी शादी के बारे में सोच ही नहीं पाई। पिता के देहांत के बाद सभी भाई-बहन को लता जी ने ही पाल-पोसकर बड़ा किया है। फिल्मी जगत के अन्य सितारों की तरह लता जी का नाम कभी किसी अन्य कलाकार के साथ नहीं जोड़ा गया।बहुत कम लोग जानते है कि लता मंगेश्कर ने भी अपने जीवन में संगीत के अलावा किसी से प्यार किया है।

डुंगरपुर के महाराज राज सिंह और लता के बीच अच्छी दोस्ती मानी जाती थी। राज और लता के भाई ह्रदयनाथ मंगेश्कर अच्छे दोस्त थे। राज को क्रिकेट बेहद पसन्द था और कई सालों तक वह बीसीसीआई से भी जुड़े रहे थे। ऊंचे घराने से होने के कारण राज सिंह के पिता जी नहीं चाहते थे की कोई गायिका उनके घर की बहु बनें। राज सिंह ने अपने पिता का वचन निभाने के कारण कभी शादी नहीं की। हालांकि लता जी ने कभी इस बारे में चर्चा नहीं की।

1962 में दिया गया था ज़हर

1960 के दशक तक लता जी एक गायिका के रुप में अपनी पहचान बना चुकी थी। इसी दौरान कोई उनकी कामयाबी से जलने लगा था। 1962 में किसी ने लता जी को स्लो पॉइज़न दे दिया था। लता जी की तबियत बिगड़ने पर इसका खुलासा हुआ। 10 दिन तक उनकी स्थिति गम्भीर बनी रही थी। उस बीमारी से उभरने में लता जी को 3 महीने लग गए थे। इस दौरान वह किसी फिल्म में गाना नहीं गा पाई थी।

लता जी को जहर किसने दिया था, इस बात का खुलासा नहीं हो पाया था। लेकिन शक उनके रसोइये पर जा रहा था। लता जी की तबियत बिगड़ने के बाद वह अचानक कहीं गायब हो गया था। मशहूर लेखक मजरुह सुल्तानपुरी ने लता जी के बीमार रहने के दौरान काफी मदद की थी। लता जी को खाना देने से पहले मजरुह खुद उस खाने को टेस्ट करते थे।

वर्ल्ड रिकोर्ड समेत सैकड़ो अवॉर्ड किए अपने नाम

1974 में लता जी का नाम गिनीज़ बुक ऑफ वर्ल्ड रिकोर्ड में दर्ज किया गया था। इस वर्ष तक लता जी 28,000 से ज्यादा गाने गा चुकी थी, जो अपने आप में एक वर्ल्ड रिकोर्ड था। लता जी ने मोहम्म्द रफी के साथ काफी गाने गाये थे। इस वजह से रफी के प्रशंसको द्वारा एतराज किया गया कि लता जी को यह रिकोर्ड नहीं मिलना चाहिए क्योंकि उन्होंने वह गाने अकेले नहीं गाए है। 1984 में रफी की मृत्यु के बाद लता जी का नाम वर्ल्ड रिकॉर्ड में शामिल किया गया। लेकिन कुछ समय बाद लता की बहन आशा भोसले ने यह रिकोर्ड अपने नाम कर लिया था।

Lata Mangeshkar
Source: Scroll

लता जी को 6 फिल्म फेयर पुरस्कार, 3 नेशनल फिल्म पुरस्कार के अलावा दादा साहेब फाल्के अवार्ड, पद्म श्री, पद्म विभूषण और भारत रत्न से सम्मानित किया जा चुका है। संगीत के क्षेत्र में भारत रत्न प्राप्त करने वाली लता पहली भारतीय महिला थी। लता जी एक मात्र ऐसी जीवित व्यक्ति हैं, जिनके नाम से अवॉर्ड भी दिए जाते हैं। 1984 में मध्य प्रदेश सरकार ने लता मंगेश्कर पुरस्कार देने की घोषणा की थी। इसके बाद 1992 में महाराष्ट्र सरकार ने भी उनके नाम से पुरस्कार देने का एलान कर दिया था।

1980 के दशक के बाद लता जी ने फिल्मों में गाना कम कर दिया था। इसके बाद उन्होंने स्टेज परफोर्मेंस की ओर अपना ध्यान दिया। लता मंगेश्कर को क्रिकेट बहुत पसन्द है और सचिन तेंदुलकर उनके पसंदीदा खिलाड़ी हैं। भारत में सम्मान के तौर पर लता मंगेश्कर को लता दीदी के नाम से पुकारा जाता है।

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